November 18, 2017

सलमान खान को है ये खतरनाक बीमारी !

जी हाँ , करोड़ों दिलों की धड़कन सलमान खान काफी समय से एक खतरनाक बीमारी से पीड़ित हैं | इस बात का खुलासा उन्होंने कुछ समय पहले एक इंटरव्यू में किया , जब उन्होंने बताया की उन्हें "Trigeminal neuralgia" नामक बीमारी है | इस बीमारी को Suicide Disease भी कहते हैं | इस बीमारी में पीड़ित व्यक्ति की चेहरे पर काफी दर्द होता है, जो की सर्दी के मौसम में ज्यादा परेशान करता है | इस बीमारी के चलते सलमान को ठंडी जगहों पर शूटिंग करने में काफी तकलीफ का सामना करना पड़ता है | Tubelight और टाइगर जिंदा है  की शूटिंग के दौरान भी उन्हें इस दर्द का सामना करना पड़ा | सलमान ने अपने इंटरव्यू में यह भी बताया की इस
बीमारी की वजह से आत्महत्या करने वाले लोगों की दर सबसे अधिक है |

क्या है Trigeminal neuralgia ?
Trigeminal neuralgia चेहरे की तंत्रिकाओं (nerves) के विकार को कहते हैं। चेहरे पर trigeminal nerves की सूजन के कारण ये विकार उत्पन्न होता है और यह सूजन तीव्र दर्द पैदा करती  है। दर्द इतना गंभीर हो सकता है कि रोगी अक्सर अवसाद (Depression) के शिकार बन जाते है | यही  डिप्रेशन कभी-कभी आत्महत्या का कारण  भी बन जाता है | अभी तक इस बीमारी के असली कारण का पता नहीं चला है लेकिन ये बीमारी अक्सर उन लोगों को होती है जिनके चेहरे में सिकुड़ी हुई नसें या tumour होते हैं | दर्द अक्सर तब शुरू होता है जब आप दांतों पर ब्रश करते हैं या मुंह धोते हैं |
क्या है Trigeminal neuralgia का इलाज ?
शुरू में इस बीमारी का इलाज दवाइयों से किया जाता है | कई बार इस बीमारी का असली कारण कोई और बीमारी होती है , जिसे ठीक करने से ये बीमारी अपने आप ठीक हो जाती है | यदि दावैयों से ये बीमारी ठीक नहीं हो पाती और समय के साथ दवाई का असर कम होने लगता है तो फिर डॉक्टर इंजेक्शन या सर्जरी के माध्यम से इलाज का प्रयास करते हैं |

September 5, 2017

शिक्षक , अध्यापक और गुरु में क्या अंतर है

आज शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर सभी शिक्षकों को बधाइयाँ मिल रही हैं | लेकिन एक सत्य ये भी है की हमारा समाज शिक्षक शब्द का अर्थ भी भूलता जा रहा है | हम अध्यापक और शिक्षक को एक ही समझने लगे हैं | एक अध्यापक शिक्षक हो सकता है , लेकिन ये जरूरी नहीं की हर अध्यापक शिक्षक हो | इस बात को समझने के लिए आपको  शिक्षक , अध्यापक और गुरु जैसे शब्दों का शाब्दिक अर्थ पता होना जरूरी है | हिंदी एक अनूठी भाषा है | हम कुछ शब्दों को पर्यायवाची समझते हैं , जबकि असलियत ये है की हिंदी के हर शब्द का अर्थ अलग है | कुछ शब्द एक जैसे प्रतीत होते हैं , पर उनके असली अर्थ में कुछ बारीक फर्क जरूर होता है | शिक्षक और अध्यापक भी दो ऐसे ही शब्द हैं | जो लोग गुरु को शिक्षक समझने की भूल करते हैं , उन्हें तो अपनी शब्दावली को विकसित करने की जरूरत है |

शिक्षक: शिक्षक से हम शिक्षा प्राप्त करते हैं | शिक्षक वह व्यक्ति  है जो हमें जीवन में उपयोग में आने वाली चीज़ें सिखाता है | इसमें व्यावहारिक ज्ञान से लेकर हमारे त्योहारों और रीती रिवाजों तक का ज्ञान शामिल होता है | इसीलिये किसी भी व्यक्ति का सबसे पहला शिक्षक उसके माता पिता व् सगे सम्बन्धी होते हैं | शिक्षक हमें शिक्षा देने के बदले किसी आर्थिक लाभ की अपेक्षा नहीं रखते, बल्कि सम्मान की अपेक्षा रखते हैं |

अध्यापक : अध्यापक वह होता है जो हमें अध्ययन कराये | इसका अर्थ यह है की अध्यापक हमें किताबी ज्ञान देता है | इस तरह का ज्ञान हमें कागज़ी प्रमाणपत्र अर्थात डिग्री लेने में मदद करते हैं | अध्यापक किसी ऐसे संसथान का अंग होते हैं जो हमें कागज़ी ज्ञान देने के बदले अध्यापक को वेतन प्रदान करता है | कुछ अध्यापक हमें शिक्षक की भूमिका निभाते हुए भी मिलते हैं जो उन्हें बाकी अध्यापकों से अलग व् बेहतर बनता है |

गुरु : गुरु वह होता है जो हमें सबसे उच्च कोटि का ज्ञान दे | उच्च कोटि के ज्ञान का अर्थ आध्यात्मिक ज्ञान | ये ज्ञान हमें एक साधारण मनुष्य से कुछ अधिक बना देता है | ये वह ज्ञान है जो हमें किसी शिक्षक या अध्यापक से प्राप्त नहीं हो सकता | एक अध्यापक या शिक्षक हमें अपने जन्म या धन से मिल सकते हैं , किन्तु एक गुरु को आपका ढूँढना व् अर्जित करना पड़ता | किसी गुरु का शिष्य बनने के लिए आपका अपनी पात्रता सिद्ध करनी पड़ती है | एक शिक्षक या अध्यापक जब आपको शिक्षा देता है हो उसके पीछे उसका कुछ स्वार्थ निहित होता है , लेकिन एक गुरु का ज्ञान निस्वार्थ होता है |

इन तीन के अलावा शुद्ध हिंदी में कुछ अन्य भी मिलते जुलते शब्द हैं जो अक्सर प्रयोग में लाये जाते हैं लेकिन किसी को उनका असली अर्थ नहीं पता |

आचार्य: आचार्य वह व्यक्ति होता है जो अपने द्वारा अर्जित ज्ञान को अपने आचरण / व्यव्हार का अंग बना लेता है और फिर उस ज्ञान को अपने शिष्यों को देता है | आचार्य एक ऐसी स्तिथि है जो अध्यापक से कुछ अधिक है और गुरु से कुछ कम |
प्राचार्य : प्राचार्य आचार्य से श्रेष्ठ होता है | प्राचार्य ये सुनिश्चित करता है की जिसको वह ज्ञान दे रहा है वो भी उस ज्ञान को अपने व्यव्हार का अंग बना रहा है |

आज के दौर में जहाँ किताबी ज्ञान का बोल-बाला है वहां माता पिता यह भूलते जा रहे हैं की आपके बच्चे को विद्यालय में अध्यापक अवश्य मिल जायेंगे किन्तु शिक्षक नहीं | आज के दौर में बच्चों को सर्वाधिक आवश्यकता एक अच्छे शिक्षक की होती है , जो बहुत कम माता-पिता या अध्यापक बन पाते हैं | एक अच्छे शिक्षक के आभाव में बच्चे पढ़ तो जरूर लेते हैं किन्तु वो व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त नहीं कर पाते जो उन्हें एक उच्च कोटि का ज्ञानवान मनुष्य बनाये |

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January 30, 2017

क्या आतंकवाद को किसी के धर्म से जोड़ना सही है ?

वैसे तो आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता | चंद  सिरफिरे लोगों की वजह से आतंकवाद को किसी धर्म से जोड़ना सही नहीं है | लेकिन ये भी सभी जानते हैं की दुनिया भर में किस धर्म से जुड़े हुए लोग आतंकवाद में सबसे ज्यादा लिप्त हैं | नौ -ग्यारह का आतंकवादी हमला , ओसामा-बिन-लादेन , ISIS और न जाने कितने आतंकवादी हमले एक ही धर्म को इन हमलों से जोड़ते हैं | लेकिन फिर भी एक संवेदनशील इंसान आतंकवाद को किसी धर्म से नहीं जोड़ेगा | आतंकी गतिविधियों में लिप्त ज्यादातर युवा या तो भटके हुए हैं, या भड़काए हुए हैं, या किसी व्यक्तिगत फायदे के लिए आतंक फ़ैलाने में लगे हैं | लेकिन ये भी सच्चाई है की सभी विचारक इतने संवेदनशील नहीं हैं | कुछ व्यक्ति ऐसे भी होते हैं जो बिना किसी की संवेदना की चिंता करे सच बोलना ही अपना धर्म मानते हैं |

आज के समय में ज्यादातर सवालों के जवाब Google पर आराम से मिल जाते हैं | इसलिए हमने Google Trends की मदद से ये जानने की कोशिश करी की दुनिया क्या सोचती है |  Google Trends के जरिये हम ये जान सकते हैं की दुनिया में लोग किन शब्दों को ज्यादा search करते हैं | धर्म और आतंकवाद को जोड़ कर देखने के लिए हमने नीचे दिए गए शब्दों को जांच में प्रयाग किया |


यदि आप ग्राफ्स को समझते हैं तो आपको ये जानने में दिक्कत नहीं होगी की दुनिया भर में लोग किस धर्म को आतंकवाद से जोड़ कर देखते हैं | आप ये जानकारी इस compare लिंक पर जा कर भी देख सकते हैं |  आप में से कुछ लोग ये भी कह सकते हैं की यह जानकारी एकतरफा है , और इस्लाम की मान्यता भी विश्व में काफी ज्यादा है | इसलिए हमने Google Trends पर इन्ही धर्मों के नाम search कर के देखे | इसका जो परिणाम आया वो नीचे दिया गया है |


इस परिणाम से ये स्पष्ट हो गया है की किस धर्म की मान्यता ज्यादा है | इसे Google Trends में देखने के लिए compare लिंक पर देख सकते हैं |

जिन परिवारों ने आतंकवादी हमलों में अपनों को खोया है , वो आतंकवाद को उसके धर्म या जाती से जरूर जोड़ेंगे | ये इंसानी फिदरत है | आप कितना ही समझाओ की वो आतंकवादी थे और उनका कोई ईमान या धर्म नहीं है , वो नहीं समझेंगे |

कट्टरता किसी भी धर्म में हो , वो सही नहीं है | एक सच्चा धार्मिक व्यक्ति कट्टर हो ही नहीं सकता | और अगर वो कट्टर है तो इसका मतलब सिर्फ इतना है की उसे अपने धर्म का सही ज्ञान ही नहीं है |

यहाँ दिए गए तथ्यों से किसी की धार्मिक मान्यता को ठेस पहुचना हमारा मकसद नहीं है | लेकिन ये सभी तथ्य ये साबित करने के लिए काफी है की खोट हम सब में है | किसी में कम है, किसी में ज्यादा | जिनमे ज्यादा है , उन्हें अपने नौजवानों को ज्यादा समझाने की जरुरत है | ज्यादातर नौजवान ही आतंकवाद की बीमारी से ग्रस्त हैं | यदि आज से सभी धर्मों के परिवार अपने बच्चों को गलत संगत से बचाएँ और सही मार्गदर्शन दें तो आने वाले २०-२५ सालों में आतंकवाद की बीमारी को कम किया जा सकता है |

January 29, 2017

भारतीय धर्मनिर्पेक्षता : एक राजनितिक छल

धर्मनिर्पेक्षता (Secularism), भारत में इस्तेमाल होने वाला एक ऐसा शब्द बन गया है जिसका उपयोग किसी की भलाई के लिए कम, राजनितिक दलों के इस्तेमाल के लिए ज्यादा हुआ है | यदि आप भारतीय धर्मनिर्पेक्षता के बारे में ज्यादा जानकारी एकत्र करेंगे तो पाएंगे की ये वास्तव में धर्मनिर्पेक्षता है ही नहीं | भारतीय संविधान में धर्मनिर्पेक्षता को एक कानून के रूप में ठीक से लागू किया ही नहीं गया, न ही इसकी कोई सही परिभाषा लिखी गयी | Wikipedia पर Secularism in India नामक एक लेख में ये बात सही तरीके से बताई गयी है | वहां नीचे दी गयी पंक्ति हुबहू लिखी गयी है |

  • "Neither India's constitution nor its laws define the relationship between religion and state."
  • "Religious laws in personal domain, particularly for Muslim Indians, supersede parliamentary laws in India; and currently, in some situations such as religious indoctrination schools the state partially finances certain religious schools. These differences have led a number of scholars[8][30][31] to declare that India is not a secular state, as the word secularism is widely understood in the West and elsewhere; rather it is a strategy for political goals in a nation with a complex history, and one that achieves the opposite of its stated intentions."

जहाँ एक तरफ भारतीय संविधान सभी धर्मों को मान्यता देता है, और किसी एक धर्म को भारत का राष्ट्रीय धर्म नहीं मानता , वहीँ दूसरी तरफ मुस्लिम धर्म को अलग धार्मिक कानून मानने की अनुमति देता है | यही बात भारतीय धर्मनिर्पेक्षता को बाकी दुनिया की धर्मनिर्पेक्षता से अलग करती है | हालाकि भारत में हिन्दू धर्म की जनसंख्या सबसे ज्यादा है, फिर भी उनको व् अन्य सभी धर्मों को एक ही कानून मानना पड़ता है |

कौन धर्मनिरपेक्ष और कौन धार्मिक ?

भारत में जो व्यक्ति या संस्था हिन्दुओं के हितों को ध्यान में रख के बात करे , उस पर राजनितिक दल "धार्मिक" होने का आरोप लगाते हैं , और जो मुस्लिमों के पक्ष में बोले वो धर्मनिरपेक्ष | तसलीमा नसरीन का एक वक्तव्य इस बात को साबित करने के लिए काफी है |


भारत में आप किसी भी धर्म की धार्मिक भावनाओ से खेल सकते हैं, लेकिन मुस्लिमों की नहीं (ये तसलीमा नसरीन के विचार हैं )|  वैसे तो किसी भी धर्म की धार्मिक भावनाओ से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए लेकिन सबको एक कानून मानने को विवश करना ही सही धर्मनिर्पेक्षता है | नीचे दी गयी अखबार की कटिंग शायद आपका ध्यान इस ओर खींचे |

मुस्लिमों को अलग कानून मानने की अनुमति देना "समानता के अधिकार" का भी उलंघन है | वैसे तो आरक्षण भी समानता के अधिकार का उलंघन है, लेकिन वो अलग विषय है | भारतीय संविधान ऐसी गलतियों से भरा पड़ा है , लेकिन ये कहने वालों को भी धार्मिक होने का आरोप झेलना पड़ता है | भारत की इसी धर्मनिर्पेक्षता की वजह से आज भी बाल-विवाह , बहु-विवाह (polygamy) व् ट्रिपल-तलाक जैसे विवादस्पद विषय आज भी भारत में चर्चा का विषय बने हुए हैं | कई हिन्दू संघटन मुस्लिमों पर अपनी जरुरत के हिसाब से कानून का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाते हैं| वे कहते हैं की शादी से सम्बंधित चीज़ों में ये शरियत कानून मानते हैं लेकिन अन्य फौजदारी (चोरी, मर्डर व् अन्य) मुकदमों में ये कॉमन सिविल लॉ मानते हैं, क्योंकि शरियत के हिसाब से उसकी सजा ज्यादा कठिन है |

कुल मिला कर धर्मनिर्पेक्षता को आज तक सिर्फ राजनितिक फायदे के लिए ही इस्तेमाल किया गया है | सब दलों को ये पता है की यदि कोई दल सही मायनों में धर्मनिर्पेक्षता को लागू करेगा तो उसे मुस्लिम वोटों से हाथ धोना पड़ेगा | और जो दल थोडा बहुत भी हिन्दुओं के लिए काम करेगा उसे धार्मिक दल होने का आरोप सहना पड़ेगा |

January 12, 2017

एक्लिप्स ओवर बंकोक (Eclipse over Bangkok)





यहाँ दिया हुआ चित्र सूर्य ग्रहण का एक बेहद ही अदबुध चित्र है जो की बंकोक से लिया गया है इसी लिए इसे एक्लिप्स ओवर बंकोक कहा जाता है | यह दृश्य 15 Jan 2010 को देखने को मिला था | जैसा की आप सब देख सकते है की दिए हुए चित्र में हमें एक हवाई जहाज़ नजर आरा है जो की एक्लिप्स में अलग ही लग रहा है|

यह एक्लिप्स सबसे बड़ा और बहुत समय तक रहा था, करीब 11 min 7.8 sec | इसी दौरान बहुत सारी तस्वीरे अलग अलग जगह से ले गयी जिनमे से यह भी एक है | आपकी जानकारी के लिए बता दे की सोलर एक्लिप्स तब होता है जब चाँद धरती और सूर्य के बीच में से निकलता है, यह भी कुदरत के नायब करिश्मो में से एक है |

January 11, 2017

चिंपांज़ी ने पाले टाइगर के बच्चे (Chimpanzee Mother)



जैसा की आप सब इन चित्रों में देख सकते है की किस प्रकार एक चिंपांज़ी ने एक टाइगर के बच्चे को अपनी बाहों में भरा हुआ है, इस चित्र को देख कर कोई भी समझ सकता है की आज भी हमें इन बेजुबान जीवो से बहुत कुछ सीखना बाकि है | चलिए अब हम आप सब को इस चिंपांज़ी के बारे में बताते है जिसका नाम अंजना है और जिसने बड़ी ही एहतियात से इन टाइगर के बच्चों को पाला है बल्कि यह एक ऐसी माँ है, जिसने  माँ के नाम को एक नयी एहमियत दी है |



यह कहानी चाइना यॉर्क केयर की है जिसमे अनजाना नाम के चिंपांज़ी ने इन दो नन्हे बच्चों को बड़ी ही देखभाल से पाला है, जैसे की आप दिए गए चित्रों में देख सकते है किस प्रकार अनजाना ने इन दोनों बच्चों को पकड़ा हुआ है जिनका नाम मित्रा और शिवा है | 

स्पाइडर मेन छिपकली (SpiderMan Lizard)



हमारे द्वारा दिए गए चित्र में आप सब को एक स्पाइडर-मेन छिपकली (Spider-Man Lizard) यानि एक अध्भुध छिपकली जो की स्पाइडर मेन के रूप में नजर आ रही होगी | लेकिन यह एक असली छिपकली है जिसका नाम Agama mwanzae जो की तंज़ानिया,रवांडा, केन्या जैसे जगह पर पाई जाती है | इस प्रकार की छिपकली पूरे विश्व में मशहूर है क्योंकि यह स्पाइडर-मेन नाम के करैक्टर से हुबहू मिलती है, क्योंकि इस का रंग लाल और बैंगनी है | सन 2009 में ये चित्र इन्टरनेट पर चर्चा में आ गया था |



आज की इस विशाल दुनिया में कुछ भी मुमकिन है | इस तरह की छिपकली का जिसका ज़िक्र आप सब ने सिर्फ कहानियो में ही सुना होगा या फिर कुछ अद्भुत फिल्मों में देखा होगा जैसे स्पाइडर मन नाम की अंग्रेजी फिल्म में |

June 4, 2016

बलात्कार का विरोधी हमारा बॉलीवुड और मीडिया ?

आपने अक्सर देखा होगा की जब कोई बलात्कार की खबर नेशनल टीवी की खबर बनती है, जैसा की निर्भया काण्ड में हुआ था , तब बॉलीवुड हस्तियाँ महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की बात करने के लिए न्यूज़ चैनल्स पर बढ़ चढ़ कर बयान देते हैं. न्यूज़ चैनल्स के रिपोर्टर्स भी उन की ही बातें सारे दिन टीवी पर दिखाते हैं | आखिर सच्चाई क्या है ? क्या वाकई इन कलाकारों को कोई फर्क पड़ता है इन घटनाओं से ? या ये भी सिर्फ एक पब्लिसिटी स्टंट होता है | क्या न्यूज़ चैनल्स इन पीड़ित लड़कियों के साथ इन्साफ करना चाहते हैं |

बलात्कार का विरोधी हमारा बॉलीवुड ?


वो कहते हैं "We are gathering for a good cause", काहे का गुड कॉज ! वो महिलाओं के सम्मान की बात करते हैं और अपनी फिल्मों में नग्नता की सारी हदें पार कर देते हैं, और कोई पूछे तो कह देते हैं की ये तो स्टोरी की डिमांड थी ! Its a form of Art ! कोई इनसे पूछे की क्या आर्ट सिर्फ कपडे उतार के ही दिखाई जा सकती है क्या ?
क्या आज तक बलात्कार का विरोध करने वाली किसी हिरोइन ने ये कहा है की वो अबसे कोई हॉट सीन नहीं करेगी |

कहने को तो s-e-x भी कोई बुरी चीज़ नहीं है , यदि पति पत्नी के बीच हो , लेकिन हर चीज़ का एक सही टाइम होता है, सही जगह होती है | लेकिन बॉलीवुड ने स्त्री की मर्यादा को तार तार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है | बेडरूम में भी कैमरा घुसा दिया है | बलात्कार की घटना का चित्रण भी इतनी गहराई से होता है की ..... अब क्या बोलूं !

बॉलीवुड के एक्टर्स, डायरेक्टर्स अक्सर ये भी कहते हैं की वो सिर्फ वो दिखाते हैं जो दुनिया देखना चाहती है | कोई उन्हें ये जवाब क्यों नहीं देता की ये तर्क तो ब्लू फिल्म बनाने वाले भी दे सकते हैं |

अगर कोई ये बात बॉलीवुड वालों से कह दे की बलात्कार की बढती घटनाओं के पीछे आपका भी योगदान  है तो इनका गुस्सा भी देखने लायक होगा | उनका जवाब कुछ ऐसा होगा की बुराई तो देखने वाले की आँखों में है , वो तो सिर्फ सुन्दरता दिखाते हैं | ये देखने वाले की मानसिकता पर निर्भर करता है की वो उनकी मूवीज देख के क्या सीखे | बात सही है |

बलात्कार का विरोधी हमारा मीडिया ?


अब थोडा सा मीडिया की भी बात कर लें | चाहे न्यूज़ चैनल हों या प्रिंट मीडिया , बलात्कार की खबरें धड्दले से प्रकाशित होती हैं | जैसे की लोग टीवी देखे ही इसलिए हों की कोई बलात्कार खबर देखें | और तो और ऐसी घटनाओं का नाट्य रूपांतरण भी प्रस्तुत किया जाता है, की समझने में कोई कमी न रह जाए की क्या हुआ और कैसे हुआ | मीडिया ट्रायल भी होता है, जैसे के यही इन्साफ हो जाएगा | पीड़ित के सगे सम्बन्धियों को इस विश्वास के साथ बात करने के लिए बुलाया जाता है की इससे आपको अपनी आवाज़ उठाने में मदद मिलेगी | लेकिन अक्सर ये होता है की मीडिया वाले अपने टीआरपी का उल्लू सीधा करने में लगे होते हैं | उन्हें दर्शकों और पीड़ित के परिवार की भावनाओं का फायदा उठा कर अपने विज्ञापन भी साथ में दिखाने होते हैं | घोड़ा घास से दोस्ती तो नहीं कर सकता | कभी सुना है की इन्ही मीडिया वालों ने किसी पीड़ित का कोर्ट केस लड़ने का खर्चा उठाया हो | मेरी जानकरी में तो ऐसा कभी नहीं हुआ | अगर हुआ होता तो न्यूज़ चैनल इस चीज़ का भी गीत गा देते |
कई न्यूज़ चैनल्स एक जिम्मेदार मीडिया की भूमिका भी निभाते हैं और बड़े सभ्य तरीके से चीज़ों को सुधारने के बारे में भी चर्चा करते हैं (बिना पीड़ित के परिवार को बुलाये)|  बलात्कार के मामले में पीड़ित के परिवार को न बुला कर , उन लोगों के चेहरे बार बार टीवी पर दिखाने चाहिए जो अपने चेरों पर काले कपडे ढक कर पुलिस कस्टडी में ले जाए जाते हैं | मीडिया वालों को असली गुनेहगार के परिवार से बात करनी चाहिए, और उसे टीवी पर दिखाना चाहिए |
कई न्यूज़ चैनल्स दस मिनट में सौ खबरें दिखाते हैं , और उनमें ज्यादातर खबरें दुर्घटनाओं या बलात्कारों की ही होती हैं | ऐसा महसूस होता है की हम दुनिया में नहीं, नरक में रह रहे हैं | नेगेटिव चीज़ें दिखाने से नेगेटिव चीज़ ही बढती है | आप पॉजिटिव खबरें दिखा के ही समाज से नेगेटिव चीज़ें खत्म कर सकते हैं | लेकिन ये भी सच्चाइ है की सिर्फ पॉजिटिव चीज़ें दिखाने लगे तो न्यूज़ देखेगा कौन ?| यही तो खासियत है नेगेटिव चीजों में , की वे हमें अपनी तरफ खीचती हैं , और इसी का न्यूज़ चैनल्स फायदा उठाते हैं |

इसका इलाज़ यही है की सारे दिन न्यूज़ चैनल्स पर चिपकने के बजाये कोई एक ऐसा न्यूज़ प्रग्राम पकड़ लें जिसमें आपको सही तरीके से न्यूज़ मिलती हो और आप अपने आस पास और अपने देश में हो रही गतिविधियों को जान सकते हों | और भी चैनल्स हैं टीवी पर ! ज्ञान वर्धन के लिए डिस्कवरी जैसे चैनल्स देखें |

क्या स्त्री का शरीर केवल मार्केटिंग के लिए है ?


आज के दौर में स्त्री की नग्नता , मार्किट में सामान को बचने का एक तरीका हो गया है | वो सामान चाहे एक मूवी हो , एक चॉकलेट हो , एक बिस्तर का गद्दा हो, एक मोबाइल फ़ोन हो | जब तक एक कम कपडे पहने हुए लड़की उसका उपयोग करके नहीं दिखायगी , तब तक वो चीज़ बाज़ार में बिकेगी नहीं | और तो और दिवाली जैसे त्यौहार के लिए एक पटाके का पैकेट लेने लगो , तो उस के ऊपर भी एक ऐसी ही कम कपड़ों वाली लड़की की फोटो जरूर छपी होगी |

पुराने दौर में एक कंडोम का विज्ञापन भी बस एक छोटो सा गाना होता था "प्यार हुआ इकरार हुआ ...प्यार से फिर क्यों डरता है दिल " | समझने वाले उस से ही सब समझ जाते थे | अब पता नहीं लागों की समझ कमज़ोर हो गयी है या समझाने वाले ज्यादा समझदार और कम्पटीशन के सताए हो गए हैं, की ऐसा विज्ञापन बनाते हैं की बच्चे भी सब समझ जायें , और बड़े टीवी का रिमोट ढूँढ़ते रह जायें |

आज के दौर में एक तरफ स्त्री पुरुष के बराबर ही नहीं, बल्कि उस से ऊपर भी निकल रही है | वहीँ दूसरी तरफ खुद को मॉडल्स कहने वाली स्त्री अपने शरीर का मार्केटिंग के लिए इस्तेमाल होने दे रही है | यदि कोई चाहे तो बिना नग्नता दिखाए भी सुन्दरता दिखा सकता है | यदि एक स्त्री ये द्रढ़ निश्चय कर ले की अपने शरीर का इस्तेमाल नहीं होने देगी, तो कोई उसे ये करने को विवश नहीं कर सकता | रही बात पैसे कमाने की, तो कोई दूसरा काम भी किया जा सकता है| लेकिन यदि आप पब्लिसिटी पाना ही अपने जीवन का लक्ष्य मानते हैं तो एक आदर्श कलाकार की तरह भी पा सकती हैं |  

आज की दुनिया में कोई इंसान मर्यादा पुरिशोत्तम नहीं है | हर आदमी के अन्दर एक हवस दबी हुई है , जो कुदरती चीज़ है | अगर ये न हो तो दुनिया ही न हो | लेकिन फिल्में देख के कुछ इंसानों की ये हवस कम उम्र और अज्ञानता व् संस्कारों के आभाव में उन्हें गलत दिशा में ले जाती है | ऐसे इंसान औरतों को उन्ही हिरोइन्स के कपड़ों में देखना हैं जिन्हें देख कर वो पिक्चर हॉल्स में हूटिंग करते हैं | ऐसे आदमी असल ज़िन्दगी में भी शिकार की तलाश ही करते हैं |

आज के दौर में बढती हुई बलात्कार की घटनाओं को रोकने के लिए केवल सरकार को नहीं बल्कि हमारे बॉलीवुड , मीडिया और खुद स्त्रियों को सोचने की जरूरत है | सही पढाई और संस्कार लड़कों के लिए भी उतने ही जरूरी हैं जितने लड़कियों के लिए |

नोट: हम किसी तरह के कपड़ों के विरोधी नहीं है | न ही हम स्त्रियों पर कोई पाबंदी लगाने के पक्ष में हैं | लेकिन जैसे खाने पीने की और स्वछता की सही आदतें हमें बिमारियों से बचा सकती हैं , वैसे ही जगह के हिसाब से सही पहनावा पहनने से हम सामाजिक बुराइयों से भी बच सकते हैं | बीमारी का इलाज करने से अच्छा यही है की हम बीमारी होने ही न दें |

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मथुरा के "सत्याग्रही" कातिलों की अजीबो-गरीब मांगें

मथुरा में हुए दर्दनाक हादसे का एक चेहरा

मथुरा में हाल ही में हुई घटना ने सारे देश को चौंका दिया | कोई ये सोच भी नहीं सकता था की आज के भारत में कोई इन्सान अपनी अलग फ़ौज बनाने की सोच सकता है | लेकिन ये सब हुआ और वो भी मथुरा जैसे शहर में | "आज़ाद भारत विधिक वैचारिक क्रांति सत्याग्रही समूह" का दावा है कि वे सुभाष चन्द्र बोस के अनुयायी हैं और देश पर आजाद हिन्द सेना का राज चाहते हैं | इस समूह की बाकी मांगे पढ़ कर आप हसी से लोट पॉट भी हो सकते हैं | लेकिन इसमें हसने जैसी कोई बात नहीं है | इस घटना से केवल यह पता चलता है की लागों की निरक्षरता और अज्ञानता का फायदा उठा कर उन्हें कैसे भ्रमित कर के गलत कामों में लगाया जाता है |

कुछ अजीबो-गरीब मांगें

  • राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का चुनाव रद्द हो |
  • सोने के सिक्के चलाये जायें |
  • पेट्रोल की कीमत घटा कर 1 रूपए में 40 लीटर की जाए |
  • डीजल की कीमत घटा कर 1 रूपए में 60 लीटर की जाए |
  • मौजूदा भारतीय गणराज्य को अवैध घोषित कर के आज़ाद हिन्द फ़ौज का शासन और कानून लागू किया जाए |
  • वर्तमान भारतीय करेंसी को हटा कर आज़ाद हिन्द फ़ौज करेंसी चलायी जाए |

इन सब मांगों को पढ़ कर आप समझ गए होंगे की मांग करने वालों की मानसिक हालत क्या होगी और वो किस गलत फ़हमी में जी रहे होंगे | सबसे बड़ी गलत फ़हमी तो ये की वो खुद को सुभाष चन्द्र बोस का अनुयायी मानते हैं , और दूसरी ये की वो मुट्ठी भर लोग पूरे भारत पर कब्ज़ा कर लेंगे |

 
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